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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए भाषा के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : hindi

तुझसे ही तो प्रेरणा पाता है समाज, ज़िंदा है ज़िन्दगी, हे मज़दूर read more

1     3.5K    186    1

मैं मातृशक्ति हूँ मैं भगिनी मैं सखी मैं ही सहगामिनी सर्व स्वरूप हैं आदरणीय समझो read more

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हारे हुए बन्दे को भी बाजी जीता जाती read more

1     2.1K    208    3

ये माना कि हर तरफ पीने के पानी की कमी है लेकिन जीव पर अत्याचार, बारिश की बेरहमी read more

1     1.5K    464    4

मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत read more

1     663    63    5

लबों से उफ्फ ना करती थी, आँखें तूने उसकी कभी पढ़ी न read more

1     2.1K    91    6

गूंगे बहरे शासन पर या खूनी सिंहासन पर उस बच्ची के जले शरीर पर या अपने देश read more

1     1.9K    117    7

ये कविता के जन्म का शब्दश: वर्णन read more

1     23.7K    664    8

न जाने क्यों मिलने पर हमारे ऐतराज़ था बहुत ज़माने को शामिल हो गए सारे एक तरफ और read more

1     415    52    9

सड़क पे निजी और धार्मिक कार्यक्रम आज़ादी है आज भीड़ द्वारा संदिग्ध की मार पीट आज़ादी read more

1     5.4K    476    10

जिसे मैंने मुसलमान समझा वो तो एक इंसान read more

1     702    72    11

वसुदेव कूटुंबकम के read more

1     486    69    12

देखने का नजरिया बदल के देख, कपड़ों से कुछ नहीं होता है, गिरती सोच का नतीजा read more

1     446    72    13

तुम एक दिन मेरे सामने, घंटों तक बैठे रहे। तुम हमको देखते एकटक, मैं बेबस देख ना read more

1     1.7K    68    14

मज़ाक और रसमलाई दोनों का हिसाब बराबर read more

2     1.1K    87    15

कर के अरदास तुम साथ दोनों का मांग read more

1     61.4K    571    16

मसलों को मैं तेरे सुलझाता रहूँगा, कर्मठता की राह पर चलाता read more

1     1.7K    72    17

एक आस है मन मस्तिष्क में, एक आस है जीवन गति में, एक सवेरा आएगा जीवन तम को ले read more

1     1.4K    63    18

एक सैनिक अपने कर्मफल के लिये, स्वर्ग के प्रवेश द्वार पर खड़ा था, मरणोपरांत अंतिम read more

2     16.6K    682    19

इन्द्र देव इस बार कुछ, ज्यादा ही नाराज़ लग रहे हैं, मुसीबत शायद देवलोक में है, जमीन read more

1     15.6K    639    20

चिंता को तू कर दे टाटा, मन में अलख जगा ले, खुद-सा साथी नहीं मिलेगा, खुद से प्रीत लगा read more

2     15.2K    628    21

जो कहता है करता नहीं और जो करता है कहता read more

1     714    449    22

जब तख्त की ज़ुबाँ बोलनेे लगे अखबार, तो कैसे लिख दूँ कि कलम की ताकत अभी ज़िंदा read more

1     21.3K    62    23

वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना read more

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इंतजार करते रहना है, या पार करते चले जाना read more

1     1.2K    153    25

यह कविता जीवन में आगे बढ़ने के लिये अथाग महेनत का महत्व समजाती है read more

2     14.4K    613    26

मृत्यु संपूर्ण और शाश्वत है । यह कविता बताती है कि जन्म की तरह ही मृत्यु का भी उत्सव read more

2     14.2K    609    27

एक वक़्त था जब सुनते थे, अब सपने देखना बंद करो,अब कहा जाता है सपने, नहीं देखोगे तो read more

1     15.0K    608    28

दूर क्यों तलाश उसकी, जो बिलकुल पास है, ख़ुशी तेरे पास खड़ी है, फिर भी तू निराश read more

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बेवजह की चिंता छोड़कर, बुढ़ापे का मज़ा read more

1     14.3K    602    30