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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance Action Inspirational

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance Action Inspirational

यूं ही नहीं मैं तुम बन जाता हू

यूं ही नहीं मैं तुम बन जाता हू

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यूं ही नहीं मैं तुम बन जाता हूं! 

तुम्हारे साथ साँसों की साझेदारी के द्वारा, 

तुम्हारे रूह तक जुड़ जाता हूँ ! 

तब मैं तुम बन जाता हूं।


तुमसे जब जिस्म से जिगर तक का फासला,

 तय कर पाता हूं, 

तब मैं तुम बन जाता हूं।

अपनी निंदिया को जब तुम्हारी ख़्वाबों में बिताते हुए, 

तुमसे प्यारी- प्यारी बतिया बतियाते हुए!

उन हसीन पलों को हकीकत में जब बिताता हूं!

तब मैं तुम बन जाता हूं।


जब तुम्हारे पलकों की छांव में, 

सुकून की उस गाँव में खुद को खोकर 

जब मैं सबकुछ पा जाता हूं!

तब मैं तुम बन जाता हूँ।

तब मैं और तुम के फासले मिट जाते हैं सारे ,

और मैं और तुम भी न होकर हम बन जाता हूं।


यूं ही नहीं मैं तुम्हें अपने रग 'रग में पाता हूं !

हर पल तुझे अपने साथ पाता हूं।

यूं ही नहीं मैं खुद में तुझको पाता हूं

और तुझमें में खुद को पाता हूं !


तुम्हारी धड़कन को अपने दिल में धड़का पाता हूं

इसलिए मैं तुमको खुद में पाता हूं। 

यूं ही नहीं मैं तुम बन जाता हूं।।


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