पुस्तक मेला
पुस्तक मेला
दुनियावी मेले से दूर
जी! करता है तुम्हें ले चलूं किताबों के मेले में
कंधें पर हाथ रखकर दिखाऊं इस खूबसूरत मेले को
जिसमें चहूं ओर सजी हैं
रंग-बिरंगी सजिल्द किताबें
उन किताबों में धड़कते शब्द
और उन शब्दों में बसा पूरा का पूरा जीवन!
दिलाना चाहता हूं दो-चार बाल कहानियां
कुछ इतिहास की पुस्तकें
कुछ संस्कृति -परंपरा की गाथाएं
कुछ जीवन की धारा को बदल देने वाले प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की जीवनियां
कुछ जीवन के विस्तृत फलक को समेटने वाले उपन्यास
और अंत में प्रेम की कविताएं
जिसमें अब भी बची हैं इस बात की संभावनाएं,
कि जीवन में बिछड़कर भी एक दूसरे के पास इसी जीवन में लौटा जा सकता है!
~बृजलाला रोहन अन्वेषी
