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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : abstract

शाम को रोज़ इक्कट्ठा हो जाना चार बच्चे मिलते ही टीचर बन जाना, पापा को अपना घोड़ा read more

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लॉर्ड गणेशा
© Payal Khekde

Children Stories Abstract

जिसमे एक प्राइमरी बालक लॉर्ड गणेशा का पोशाक पहनकर, उनका स्वरूप बनकर लोगो के सामने। read more

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हर तरफ टूट-टूट कर गिर रहा है वक्त का तंत्र और मुझे कविताओं की चिंता read more

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लबों से उफ्फ ना करती थी, आँखें तूने उसकी कभी पढ़ी न read more

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©

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इत्मिनान में कुछ वक़्त इस खामोशी को देना लाख़ों पन्नों की रचनाएं नजर read more

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नासमझ झूठ परोस अलगाव लाते हैं और समझदार, झूठ बोल, खुशियाँ बाँटते read more

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दो पल ही खिलना यहाँ, फिर सब माटी read more

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मुझे महज एक वस्तु मत समझना व्यंग बाणों का घातक प्रहार भी सहती हूँ। खिलौना नही read more

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प्यार आदर और भाईचारे के पाठ भी इन बंद मुट्ठियां से शुरू होते हैं इन बंद read more

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बस फिर... विस्मृत हो जाता है अंतर्मन में व्याप्त गीता की सीख, मद में read more

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राह हमें जिसने दिखलाई, और मंजिल तक पहुँचाया, अफसोस नाम उसका, जुबां पर कभी न read more

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वहां तुम्हारा राज चलेगा, है ना, सब कुछ read more

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टुकड़ा - टुकड़ा बंटकर भी, अपना वजूद सिद्ध कर जाऊंगी read more

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मन उदास हो गया और फिर मेरा ‘गंतव्य’ आ read more

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क्रोध मेरे आकाश को आया और लगा वो तुम्हें दिखाने बहुत जतन से मना रही हूँ कह कर कि read more

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अभी से तुम्हें आने वाले अंगारे नहीं read more

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कोई नहीं है बड़ा और न है कोई छोटा सब कोई है एक read more

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हाँ ये सच है मेरी कविता मेरी खुद की परछाई read more

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मसलों को मैं तेरे सुलझाता रहूँगा, कर्मठता की राह पर चलाता read more

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किसी विरहिणी की विरहन का, या चातक के सम्मोहन का, जीवन के नित आवर्तन का, कल read more

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©

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जो कल से नहीं सीख पाए आज तक, तो क्या उनके लिए बड़बड़ाना ज़रूरी read more

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कर्म
© Ratna Pandey

Classics Abstract

इसीलिए नेकी कर और कुएँ में डाल ही आज की सच्चाई है, जिसने इसे अपना लिया, उसने read more

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जब बेड़ियाँ तोड़ के तुम आसमान read more

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ईश्वर अल्लाह नदारद सब ढूँढा पर कोई तो मुझे मिला read more

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चार लोग
© Manjula Dusi

Abstract Comedy +1

क्योंकि मुझे उन्हें है बताना कि हर बार जो दिखता है वो होता नहीं और जो होता है वह read more

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अब मुक्त हो चुका था आपने आप को प्रभु को सौंप चुका था न यहाँ रुकने का मन read more

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डूबने वाले का उदय निश्चित है बस भोर का इंतज़ार करने में आलस ना read more

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तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हारे read more

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जहाँ कुपोषित है कानून और लोग सभी अंधे read more

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कुछ वक़्त से मैंने कुछ नया नहीं लिखा read more

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