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जद्यपि सब बैकुंठ बखाना…अवधपुरी सम प्रिय नहीं सोऊ।” जद्यपि सब बैकुंठ बखाना…अवधपुरी सम प्रिय नहीं सोऊ।”
बहनों को ठहराने के लिये वह कमरा ठीक कराया जा रहा है। बहनों को ठहराने के लिये वह कमरा ठीक कराया जा रहा है।
बाद में पता चलता है, तब समय नहीं रहता कृतज्ञता ज्ञापित करने का। बाद में पता चलता है, तब समय नहीं रहता कृतज्ञता ज्ञापित करने का।
रात्रि की रामलीला के बाद दिन में भी राम लीला होती थी। रात्रि की रामलीला के बाद दिन में भी राम लीला होती थी।
तो सफलता अवश्य मिलेगी। जैसा मन वैसी बुद्धि वैसी सृष्टि। तो सफलता अवश्य मिलेगी। जैसा मन वैसी बुद्धि वैसी सृष्टि।
स्त्रियों को भी शिक्षा,समता और समान अधिकार मिलें तभी सच्ची स्वतंत्रता है। स्त्रियों को भी शिक्षा,समता और समान अधिकार मिलें तभी सच्ची स्वतंत्रता है।
बड़ों के आशीर्वाद से ,सुझाव से समस्यायें सुलझ जाती हैं। बड़ों के आशीर्वाद से ,सुझाव से समस्यायें सुलझ जाती हैं।
विश्वासी द्रोण अपने ही सत्य प्रिय शिष्य द्वारा छले गए। विश्वासी द्रोण अपने ही सत्य प्रिय शिष्य द्वारा छले गए।
मेरी बहिन का शौक़ पान ख़ाना और खिलाना था। मेरी बहिन का शौक़ पान ख़ाना और खिलाना था।
वे गाने की ये दो लाईनें ही गा पाये थे कि रंग में भंग हो गया। वे गाने की ये दो लाईनें ही गा पाये थे कि रंग में भंग हो गया।