यही क्रम निरंतर चलता रहेगा, हर साल जिंदगी का पन्ना पलटता रहेगा। यही क्रम निरंतर चलता रहेगा, हर साल जिंदगी का पन्ना पलटता रहेगा।
जब कुछ बुरा घटित होता है और हम उसके दर्शक बनते हैं जब कुछ बुरा घटित होता है और हम उसके दर्शक बनते हैं
मैं भारत देश की मातृभाषा, राष्ट्रभाषा हूँ, मै हिन्दी भाषा हूँ। मैं भारत देश की मातृभाषा, राष्ट्रभाषा हूँ, मै हिन्दी भाषा हूँ।
नफ़रत की आग बुझाकर मुझ पर, प्यार की नदियाँ तू बहा जाना। नफ़रत की आग बुझाकर मुझ पर, प्यार की नदियाँ तू बहा जाना।
जब तू तेरी भूल समझेगी तब, मैं तुझसे दूर कहीं चला गया होगा। जब तू तेरी भूल समझेगी तब, मैं तुझसे दूर कहीं चला गया होगा।
मेरे कोमल दिल का तुम स्पर्श कर लो, दिल की धड़कन को महसूस कर लो, मेरे कोमल दिल का तुम स्पर्श कर लो, दिल की धड़कन को महसूस कर लो,
सावन की घटा में तुझ को रखूंगा मैं सनम, मेरे प्यार की छाँव कभी भी छोड़ना नहीं। सावन की घटा में तुझ को रखूंगा मैं सनम, मेरे प्यार की छाँव कभी भी छोड़ना नहीं।
बस वो थे क्षण एक अनिश्चित यात्रा काल खंड की स्थान रूका था॥ बस वो थे क्षण एक अनिश्चित यात्रा काल खंड की स्थान रूका था॥
तेरे खयालों में दिन रात मेरा उलझन में बीत गया, तेरे खयालों में दिन रात मेरा उलझन में बीत गया,
इसके साथ चलना सीखो, हर राह में मुसीबतें हैं, यह एक अपना खेल है। इसके साथ चलना सीखो, हर राह में मुसीबतें हैं, यह एक अपना खेल है।
हर बार नयी चेतना से मैं फिर खड़ा हो जाऊंगा हर बार नयी चेतना से मैं फिर खड़ा हो जाऊंगा
एक में, लाखों में, प्यार भरी आंखों में, सरसों के फूलों में, प्रीत के झूलों में, झूमता एक में, लाखों में, प्यार भरी आंखों में, सरसों के फूलों में, प्रीत के झूलों मे...
फरेबी इश्क को मैं पहचान गया हूं, फरेबी इश्क को मैं पहचान गया हूं,
मेरे दिल के दरवाजे खुल्ले है जानेमन, जब चाहे तब दरवाजे को खटखटाना। मेरे दिल के दरवाजे खुल्ले है जानेमन, जब चाहे तब दरवाजे को खटखटाना।
फिर आई मुसीबत सामने जल का स्तर था लगा बढ़ने फिर आई मुसीबत सामने जल का स्तर था लगा बढ़ने
विश्व की गहराइयों में, अनंत ज्ञान की कहानी, यही हूं मैं, जगह बनाने वाली विचारों की मल विश्व की गहराइयों में, अनंत ज्ञान की कहानी, यही हूं मैं, जगह बनाने वाली विचा...
क्या खोया क्या पाया, वो दिन तो ऐसे ही निकले।। क्या खोया क्या पाया, वो दिन तो ऐसे ही निकले।।
नये कुछ साल में हमको मौसम पर सोचना होगा! नये कुछ साल में हमको मौसम पर सोचना होगा!
लगता है की मैं तुझ से मिलता रहूंगा, कल तक भी मैं तुझे मिलता था और, लगता है की मैं तुझ से मिलता रहूंगा, कल तक भी मैं तुझे मिलता था और,
कोई बेकरार होकर भाग रहा है, कोई नफ़रत की आग में जल रहा है, कोई बेकरार होकर भाग रहा है, कोई नफ़रत की आग में जल रहा है,