Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Kishan Negi

Romance Fantasy Thriller


4.0  

Kishan Negi

Romance Fantasy Thriller


प्रेम तृष्णा

प्रेम तृष्णा

1 min 296 1 min 296

मेरे शयनकक्ष की खिड़की से

अधीर चाँद चुपके से प्रवेश करती है 

आधी रात को चोर की तरह

पागल प्रेमी के चुंबन की तरह


मेरे त्रिषित अधरों पर गिरता है 

मुरझाया हुआ कोई ख़्याल

इसकी करवटों में खर्राटे लेता है

और मेरा मन ग्लानि के तटों पर


बेपरवाह होकर लज़्ज़ा को त्यागता है 

धीरे-धीरे उसके कोमल हाथ 

मेरे वक्षस्थल की बगिया को निचोड़कर 

किनारों की प्यास बुझाते हैं 


मेरा कोमल बदन प्रीतम के लबों के लिए 

जैसे पल-पल तड़प रहा है 

करके बंद नयन, सपनों की दुनिया में खो जाती हूँ 

पाप के अग्निकुंड से वासना की लहरें 


धुंआ बनकर निकल रही है और 

फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपनी नम प्रेम भूमि को 

कर देती हूँ समर्पण

उसके इक भूखे-स्पर्श के लिए।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Kishan Negi

Similar hindi poem from Romance