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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : crime

वो दर्द की रात थी... तेज बरसात read more

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तिल वाला अंगूठा से मोबाइल में आर्टिकल लिख रही थी आजकल स्त्रियाँ सेफ नहीं read more

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अब तुम ही, कह दो छः महीने, की है उसका, क्या छिपा read more

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हे ईश्वर, तू है read more

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दोनों के दिल, रक्षासूत्र और ताबीज़ सब राज़ी थे, पर उन्हें देने वाले द्वेष और द्रोह read more

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©

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मुट्ठी में कर लेगी दुनिया सात साल की छोटी read more

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तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के read more

2     13.8K    10    1864

फिर एक दिन, वो काली घटा छाई, कुछ खूंखार दरिंदों ने ना जाने क्यों, उस पे अपनी नज़र read more

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न्याय
© Somesh Kulkarni

Crime Inspirational +1

'चिंता के कारण बुढ़िया ने मरते समय लिया था नाम, बचा लो उसको कहने वाली थी वो तब तक read more

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तलवार सी मशीनें घुस गयी, बाबा बहुत चुभ रहा था। काट रहे थे शरीर मेरा तो, बाबा बहुत read more

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मैंने तो वक़्त बदलते देखा है, मौसम और ऋतुओं के संग, लोगों का दहेज़ के प्रति, मत read more

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अब मरता सिर्फ शरीर नहीं, रिश्तों का भी खून read more

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तारों की रोशनी के बारे में एक read more

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क्यों भूल गए तुम? जब कर रहे थे तुम read more

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बाद में समझ, आने का दस्तूर क्यों read more

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सब वादे यहाँ झूठे हैं, और आँसू भी हैं read more

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मेरे तन पर वस्त्र नहीं, या है पूरा समाज अर्धनग्न read more

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तो इतना न सोचना, पर उनसे पूछना क्यों करते हैं वे ऐसा read more

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कविता
© Swapnil Vaish

Crime Inspirational

जिन्हें जीना था अभी शान से, उनको तुमने है मारा; अब तुम्हें सांस भी लेना महँगा कराया read more

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हर तरफ मातम पसरा है, घर से निकलने में खतरा read more

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लाडो
© Richa Rai

Crime Drama +1

ठुमक ठुमक के चलती थी वह, छम छम पायल बजती थी । अभी इधर थी अभी उधर थी, चलती थी या read more

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कराहती हुई रूह को सहलाते हैं खुदा करेगा इन्साफ ये समझाते read more

1     7.7K    16    3931

हर रोज स्याह होती जा रही, व्यथाओं की तस्वीर read more

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बीच में रुक गए खाना खाने दिखा घना-सा अच्छा पेड़, ठहर के खा-पी गए वे सब read more

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है वजूद मेरा read more

1     7.3K    8    4159

हर रात की तरह उस रात भी सो गया, सुनी जब खबर तो दिल मेरा भी रो read more

1     7.5K    9    4501

दरिन्दगी भर गयी है खून में हैवान कर रहे read more

1     6.9K    7    4517

आदत सी हो गयी है अबनज़रअंदाज़ करने read more

1     20.6K    10    4687

भीड़
© S Suman

Crime Drama +1

भीड़ तो ऐसी ही होती है ! अपनी प्यास बुझाने, कुछ अंतराल बाद फिर दस्तक देगी वो read more

2     6.6K    6    4818


©

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इक नारी होना गुनाह है, अपने बारे में सोचना गुनाह है, या फिर जीना ही गुनाह read more

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