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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : crime

वो दर्द की रात थी... तेज बरसात read more

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तू मेरी पुकार तक ना सुन पाई मां तू मेरी पुकार तक ना सुन पाई read more

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हम बिस्तर होने को मजबूर कराया था ! मैं हर रात वही खड़ी होजाती हूँ ! भूखे बच्चों के read more

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फिर हक़ से फेंक दिया उन दोनों को किसी कूड़े की तरह जो इस्तेमाल के बाद नहीं होता read more

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सारे अरमान कुचल दिए गए मुझे मसल दिया गया वहशी दरिंदों तुमने एकबार भी न सोच मेरी read more

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तिल वाला अंगूठा से मोबाइल में आर्टिकल लिख रही थी आजकल स्त्रियाँ सेफ नहीं read more

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यहाँ तो उनकी लाशें भी बक्शी नहीं गई है देखो इंसानियत कही मैय्यत में तो नहीं बैठी read more

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प्यार ने भी प्यार को, इसका एहसास न होने दिया। प्यार में प्यार ही तड़पता रह read more

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चलते-फिरते जिस्मों से भी सडी़-मानसिकता की गन्दी बास है आती, कुंठित समाज के लोग read more

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मत आना इस देश में लाडो यहां राम नहीं रावण बसते हैं, गली गली यहां गिद्ध हैं read more

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हे ईश्वर, तू है read more

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अब तुम ही, कह दो छः महीने, की है उसका, क्या छिपा read more

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फिर एक दिन, वो काली घटा छाई, कुछ खूंखार दरिंदों ने ना जाने क्यों, उस पे अपनी नज़र read more

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तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के read more

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बेटी लक्ष्मी होती है लिखा था एक दीवार read more

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जिस्म के साथ रूह भी जलाई कमीनों ने इस दुष्कृत्य के लिये उन दरिंदो को गरम सरिया read more

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दोनों के दिल, रक्षासूत्र और ताबीज़ सब राज़ी थे, पर उन्हें देने वाले द्वेष और द्रोह read more

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मुट्ठी में कर लेगी दुनिया सात साल की छोटी read more

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न्याय
© Somesh Kulkarni

Crime Inspirational +1

'चिंता के कारण बुढ़िया ने मरते समय लिया था नाम, बचा लो उसको कहने वाली थी वो तब तक read more

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मैंने तो वक़्त बदलते देखा है, मौसम और ऋतुओं के संग, लोगों का दहेज़ के प्रति, मत read more

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ना जाने कैसी फिर उस औलाद की गंदी सोच हो जाती है, दूध पीती बच्ची तक को जो मानसिकता read more

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निर्भया और दिसा तो दूर कुत्तों को भी नहीं छोड़ा है तू read more

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तलवार सी मशीनें घुस गयी, बाबा बहुत चुभ रहा था। काट रहे थे शरीर मेरा तो, बाबा बहुत read more

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ये नमकीन पानी तब तक मीठा नहीं होगा जब तक लड़कियों की इज्ज़त को तार तार करना बंद नहीं read more

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तारों की रोशनी के बारे में एक read more

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अब मरता सिर्फ शरीर नहीं, रिश्तों का भी खून read more

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पूछ रहा... स्त्री क्या कोई वस्तु है? उपभोग किया फिर जला दिया निर्भया पुनः दोहरा read more

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हर रोज स्याह होती जा रही, व्यथाओं की तस्वीर read more

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बाद में समझ, आने का दस्तूर क्यों read more

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मेरे तन पर वस्त्र नहीं, या है पूरा समाज अर्धनग्न read more

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