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Vishweshwar Kabade

Abstract

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Vishweshwar Kabade

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मुक्ती

मुक्ती

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मुझे अब है जागना

इस कलियुगसेेे चले जाना

जान लिया है मैंने अब दुःख का कारण

मुझे अभी मिल गया है उसका निवारण

जान ली है मैंने अध्यात्मिक शक्ति


यही दे देगी मुझे जन्मचक्र से मुक्ति

मुक्ती नहीं है मुश्किल

सिर्फ माया से दूर जाना है मुझे आज या कल

सत्य को करना है आत्मसाथ

कोई नहीं देनेेवाला यहाँ साथ


सबको लौटना है खाली हाथ

तो क्यूं करू मैं अफसोस

होकर यहाँ मायूस

समझ में आया है अब जीवन का मर्म

सिर्फ करणे बाकी है कुछ कर्म

मिथ्या है ये कलियुग का बाजार


जिधर देखो उधर सिर्फ है भ्रष्टाचार

जीवन का सबसेे बडा लक्ष्य है मुक्ति

इसीलिए मैं कर रहा हूं भगवन तेरी भक्ति।


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