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Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

पाखंड का बोलबाला

पाखंड का बोलबाला

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जहां नजर दौड़ाओ 

वहां पाखंड का बोलबाला है 

घर हो या बाहर 

कोई भी व्यक्ति आजकल 

एक सामान्य व्यवहार करता तो दिख ही 

नहीं रहा 

जो करता है 

उसे तो अयोग्य करार कर दिया 

जाता है 

जो सच बोलता है 

वह झूठे कौवों की महफिल में 

एक झूठा ही साबित किया जाता है 

किसी के दिन का अधिकतम समय तो 

घर पर या 

उसके कार्यक्षेत्र में ही व्यतीत होता है 

पाखंड का शिकार तो व्यक्ति 

सबसे पहले अपने घर पर ही 

बन जाता है 

घर परिवार के सदस्य 

उसकी जड़ को जानते हैं तो 

जो होते हैं पाखंडी 

इस तरह की कलाओं में पारंगत 

वह एक सीधे साधे इंसान का तो 

सीधा गला ही काटते हैं 

जब देखो षड्यंत्र रचते रहते हैं 

तरह तरह के मायाजाल 

फैलाये रखते हैं 

धर्म का सहारा लेकर 

सबसे अधिक अधर्म के 

कार्य करते हैं 

चेहरे पर एक झूठी मुस्कान 

आंखों में एक विजय की 

चमक लिए फिरते हैं 

हर पल उत्सव मनाते रहते हैं 

किसी से बुरा व्यवहार कर 

उसका दिल तोड़ 

उसकी आयु को कम कर 

उससे अमानवीय व्यवहार कर 

उसका हर तरह से अहित कर 

इससे उनका अहम संतुष्ट होता है 

ऐसे लोग अपने फायदे के 

लिए 

परिवार के अन्य सदस्यों को 

जो उनकी दृष्टि में 

परिवार का हिस्सा नहीं 

जिंदा ही जमीन में गाड़ 

देते हैं 

यह हर तरह के जादू टोने,

तांत्रिक विद्यायें,

आडंबर आदि कुकृत्य 

करते रहते हैं 

समाज सेवा करके 

समाज की नजरों में 

भले बने रहते हैं 

सफेदपोश काले दिल के 

लोग होते हैं 

काला जादू जानते हैं 

विकृत मानसिकता के होते हैं 

हर समय ही यह कोई न 

कोई कांड करते रहते हैं 

शराफत का चोगा पहनकर 

मासूमियत का ढोंग करके 

धार्मिक अनुष्ठान करके 

भलाई का मुखौटा मुंह पर 

लगाकर 

छोटे बड़े अपराधों को बड़ी सफाई से 

अंजाम देते रहते हैं 

शातिर इतने होते हैं कि 

सब कुछ खत्म कर देते हैं 

लोगों के जीवन तक और 

सब की आंखों में धूल 

झोंककर 

किसी की पकड़ में भी नहीं आते 

कोई अनुभवी आंख ही इनके 

पीछे लगे तो 

इनके भेद जान सकती है 

अन्यथा यह एक आम आदमी को 

मूर्ख बनाने में सक्षम होते हैं 

जो लोग शरीफ होते हैं 

सज्जन होते हैं 

सरल हृदय होते हैं 

वह इनका शिकार सबसे पहले 

बनते हैं 

समाज आजकल 

ऐसे लोगों से 

सब कुछ जानते हुए भी 

अनभिज्ञ बना रहता है 

वह सही को सही नहीं कहता और 

गलत को गलत नहीं 

अपना फायदा देखता है 

कमजोर की हर कोई गर्दन काटता 

है 

समाज का दायित्व बनता है कि 

जो व्यक्ति अपने परिवार के 

हित के विषय में नहीं सोचता 

वह समाज का क्या भला करेगा 

वह कोई अच्छा व्यक्ति कदापि 

नहीं हो सकता बल्कि 

एक पाखंडी है 

ऐसे लोगों का बहिष्कार होना 

चाहिए और 

उनसे प्रभावित हुए बिना 

उनकी पूर्ण रूप से अवहेलना 

होनी चाहिए 

ऐसे लोगों को किसी प्रकार का 

प्रोत्साहन देकर 

उनका मनोबल नहीं बढ़ाना 

चाहिए 

समाज के वरिष्ठ नागरिकों की 

इसमें एक अहम भूमिका होनी 

चाहिए 

कहीं कोई ऐसी सामाजिक संस्था भी 

गठित होनी चाहिए जहां 

कोई अपनी शिकायत दर्ज 

कराना चाहे तो करा पाये 

अपने दिल की कह पाये 

परिवार में जो वह अत्याचार 

सह रहा है 

उस अपराध को समाज के 

एक सुलझे हुए वर्ग के 

समक्ष ला पाये ताकि 

उसे समय रहते 

कोई उचित सुझाव 

सही मार्गदर्शन या 

पूर्ण या अपूर्ण 

कुछ तो न्याय मिल सके।


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