STORYMIRROR

Praveen Gola

Tragedy

4  

Praveen Gola

Tragedy

वो चली गई

वो चली गई

1 min
306

मत घबराना गर किसी रोज़ ,मैं लौट कर ना आऊँ ,

बस इतना समझना ,वो चली गई ... वो चली गई।

गर कोई पूछे तुमसे ....हुआ क्या था ?

बस इतना कह देना ,वो चली गई ... वो चली गई।

किसी को बताने से ....कुछ नहीं मिलने वाला ,

दुनिया तब भी यही कहेगी ,वो चली गई ... वो चली गई।

कह देना बहुत आवारा थी ,कईयों की आँखों की तारा थी ,अ

ब जब दिल ना भरा ....वो चली गई ... वो चली गई।

स्त्री को बदनाम करने का ,यही होता है सबसे अच्छा बहाना ,

तुम भी बस यही कह देना ....वो चली गई ... वो चली गई।

मैं अब तंग आ चुकी हूँ ,तुम्हारी रोज़ की पिटाई से ,

तुम बेशर्मी से यही कहते जाना ,वो चली गई ... वो चली गई।

आना - जाना दुनिया का मेला है ,यहाँ हर किसी का अंत अकेला है ,

इंतजार ना करके सबसे कह देना ,वो चली गई ... वो चली गई।

मत घबराना गर किसी रोज़ ,मैं लौट कर ना आऊँ ,

बस इतना समझना ,वो चली गई ... वो चली गई।|



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy