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Ravindra Lalas

Abstract Drama Others


4.7  

Ravindra Lalas

Abstract Drama Others


कहानी यों के!

कहानी यों के!

1 min 241 1 min 241

कहानी यों के,

सिलसिले, 

और किस्से भी,

कुछ कम न थे!


बहाने बातों के,

वो कहकहे, 

कहने को, 

कोई गम न थे।


मंज़र कुछ ऐसे,

थे काफिले, 

और हिस्से भी,

बस हम न थे!


कोने आंखों के,

वो हंसने वाले, 

कैसे कहें,

की नम न थे?


शिकवे वो के,

उससे भी, इससे भी,

पर लम्हे यों, 

बेरहम न थे!


जवानी जो की,

दिल के हवाले, 

तो ख्वाहिशों के,

मौसम न थे!


रवानी यों के,

जब दिल मिले, जिससे भी,

मिलने को बस,

हमदम न थे! 


हैरानी वो के,

जो साहिल मिले, 

बढ़ने को राज़ी,

कदम न थे।


फिर चाँद भीगा,

चाँदनी में,

जब खास उसके 

हम न थे।


कहानी यों के,

सिलसिले, 

और किस्से भी,

कुछ, कम न थे!


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