तुम गए तो ....
तुम गए तो ....
खाली खाली
आसमां
ही रह गया
तुम गए तो
कुछ याद
सा ही रह गया
तुम थे तो
मेरे हौसलों को
पंख था
तुम थे तो
गति थी
सुर था नया
संगीत था
तुम थे तो
रूठता
मैं रोज़ था
तुम थे तो
मानता भी
रोज था
तुम गए तो....
खाली मंदिर,
खाली घर
दालान है
रोशनी तो है
उसमें कहां
पहचान है
गलतियां
अब भी तो सतत
होती ही है
रोकना या टोकना
बिलकुल
मौन है
तुम गए तो.....
बेशरम सी
जिद थी
जिद तो अब भी
रह गई
आसमां छूने की
ललक थी
अब भी
रह गई
थालियां भरपूर
सजती थी
अब और सजती
रह गई
पर छूटता
तुम्हारे हाथों का
निवाला
रह गया
तुम गए तो ......
सब्जियां सब ही
बारहमासी है
कच्ची अमिया
जाने कब
पक जाती हैं
छत पे अब
कम सूखता
आचार है
तुम गए तो ......
