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Akanksha Gupta

Romance Tragedy


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Akanksha Gupta

Romance Tragedy


मोहब्बत उसे भी थी

मोहब्बत उसे भी थी

1 min 145 1 min 145

मोहब्बत उसे भी थी हमसे किसी ज़माने में

थी हमारी ज़ीस्त उसके बाइस किसी ज़माने में


टूट गई है इश्क़ के मोतियों की माला पल भर में

उम्र गुज़र गई आहिस्ता-आहिस्ता उसको भुलाने में


सोच कर नहीं किया जाता इश्क़ फिर मलाल कैसा

उलझ गए हैं दिल के ज़ज्बात खुद को समझाने में


नाम बदल दिया उसने अपने ही वजूद-ए-रूह का

सामने आया मगर हम नाकाम रहे पहचान पाने में


ख्वाहिश है हमारी कुछ पल और ठहर जाए ‘वेद’

क्या पता मिल ही जाए वो किसी और मयखाने में।


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