STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Fantasy Thriller

4  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Fantasy Thriller

मै एक ख्वाब हूं

मै एक ख्वाब हूं

1 min
13

मै एक ऐसा ख्वाब हूं जो, 

हर रात निंद्रामें आता हूं,

सोये हूए सब ईन्सान की,

निंद मै खराब कर देता हूं।


कभी कभी मै ईन्सान को,

मेरी दुनियामें ले जाता हूं और, 

सुंदर द्रश्य दिखाकर उसको,

निंदमें मेरे पीछे दौडाता हूं।


कभी कभी मै ईन्सान को,

माला माल कर देता हूं तो,

कभी कभी मै ईन्सान को,

मायूस भी बना देता हूं।


कभी कभी मै ईन्सान को,

आसमान में उड़ाता हूं तो

कभी कभी मै ईन्सान को,

नीचे पटक कर रुलातां हू।


मै तो एसा ख्वाब हूं "मुरली",

कभी कभी सच बन जाता हूं तो,

कभी कभी मै मुझमें डूबाकर,

चूपके से सरक भी जाता हूं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy