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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational Thriller

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational Thriller

रिश्तों की दरारें

रिश्तों की दरारें

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रिश्तों की दरारें भी अजब तमाशा करती हैं,
चेहर के स्मित में भी खामोशी छूपी रहती हैं।

महफिल में रोज आते थे, वही दूर हुए एसे,
रास्ते में मिल जाये तो भी मुंह मोड़ लेते हैं।

जिसके पर एतबार था, वह गद्दार बन गए,
इन्सान बुरे वक्त में इन्सानियत भूल जाते हैं।

मामुली सी बात वह बन गई राई का पर्वत,
ये बात सुलझाना सचमुच कठीन लगता है।

क्या करे और किससे कहें? दिल की ये बातें,
याद कर के मन हरपल मायूस बन जाता है।

रिश्तों को बचाने में नाकामयाब हो गए हम,
यही भूल जिंदगीभर हमे रुलाया करती है।

गमगीन बनकर छुपाते है हम दिल में ये दर्द,
"मुरली" ये दरारें जिंदगी जीना सिखाती है।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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