STORYMIRROR

Mukesh Kumar Modi

Inspirational

4  

Mukesh Kumar Modi

Inspirational

खुद की पीठ थपथपाना

खुद की पीठ थपथपाना

1 min
958

औरों को छोड़कर तू कर खुद से कुछ देर बात

एकान्तवासी होकर अब खुद से कर मुलाकात


परखकर खुद को तुम अपनी हर कमी मिटाना

जोहरी बनकर अपना चरित्र हीरे सा चमकाना


देहधारियों से किसी मदद की आस ना लगाना

केवल खुदा को ही तुम खुद का सहारा बनाना


खुशियों से भरी सुगंधित लहर खुद को बनाना

सदा हंसते रहना तुम और सबको तुम हंसाना


गर्व करे सब तुझ पर कुछ ऐसा कर दिखलाना

शून्य से चलकर तुम सम्पूर्णता की ओर जाना


कदम ना रुके जब तक ना मिल जाए ठिकाना

अपनी जीत पर तूँ खुद की ही पीठ थपथपाना!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational