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Harish Chamoli

Inspirational


4.6  

Harish Chamoli

Inspirational


स्वयं को पहचानो

स्वयं को पहचानो

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दिल में छिपी तमस को तुम, खुद से जरा हटाकर तो देखो;

फितूर अपने मस्तिष्क का, पुष्प सा महकाकर तो देखो;

जीवनदाता परमेश्वर की, महिमा का गान करो कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


काम आये जीवन किसी के, ऐसा हुनर लाकर तो देखो;

लालच को स्वयं दूर भगा, मन पर विजय पाकर तो देखो;

क्रोद्ध ज्वाला में न जलकर, शान्ति का पाठ पढ़ाओ कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


होना है सफल जीवन में गर, डर को हराकर तो देखो;

बुराई का अन्त कर तुम, दिल में प्यार बसाकर तो देखो;

साहिलों से लड़ने को तुम, पत्थर से भी टकराओ कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


अपने वजूद के हेतु तुम, खुद को आजमाकर तो देखो;

अंधकार मन का दूर कर, स्नेहदीप जलाकर तो देखो;

संघर्ष को समझना है तो, ठोकर खाकर संभलो कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


समझो जन के भावों को, ईर्ष्या-द्वेष मिटाकर तो देखो;

दुःख दर्द मिटाने को सबका, इक कदम बढ़ाकर तो देखो;

रह न जाये भूखा कोई, गरीब को भोजन खिलाओ कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


प्यास को महसूस कर, किसी की प्यास बुझाकर तो देखो;

बचपन जीने के लिये, खुद को बच्चा बनाकर तो देखो;

भुलो अपने सारे गम को, अकेले में गुनगुनाओ कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


हौसलों की उड़ान में, इरादों को मकसद बनाकर तो देखो;

प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से कदम उठाकर तो देखो;

खुद में जोश जगाकर, आलस की चादर हटाकर तो देखो;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


हर पथ हो आसान, लक्ष्य पर नजर लगाकर तो देखो;

जग सक्षम भी होगा इक दिन, दो अक्षर पढ़ाकर तो देखो;

अहंकार न करो जीवन में, परोपकार भी करो कभी;

अपनी अन्तःशक्ति को तुम, आज थोड़ा जगागर तो देखो।


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