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VIKASH YADAV

Inspirational


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VIKASH YADAV

Inspirational


मृत्यु से जीवन की ओर

मृत्यु से जीवन की ओर

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दिन आज का बेजान बड़ा, अनजान सा मालुम होता है ।

जीवन है छोटा, संकट गहरे, मन बादल सा रोता है ।

कभी बैठकर सोचता हूं, जन्म मेरे का कारण क्या ।

विचार अनचाहे मन मेरा, अनायास ही सांसों में पिरोता है ।


..चलो आज एक बात बताता हूं


मुसीबतें अपार, संघर्षों से हार, थक कर बैठ गया हूं जैसे ।

मृतक सा शरीर, ना जीने की चाह, उंठू मैं दोबारा कैसे ।

मतलब की दुनिया, स्वार्थ भरपूर, वाकिफ हैं सिर्फ पैसों से ।

बेरंग ये दिन, दुखो से विहीन , बताओ कौन जिएगा ऐसे ।


..चलो आज एक बात बताता हूं


 कल की एक बात सुनाता हूं, झूठ से पर्दा उठाता हूं ।

 उठा सुबह एक भर्म में, सपना लिए मर्म में, बड़ा इतराता हूं  

 है ना लक्ष्य कोई जीवन में कही, ना जाने क्यों इठलाता हूं ।

 मन में तृप्ति कभी ना हुई, फिर भी मरने से घबराता हूं।


..चलो आज एक बात बताता हूं


है चक्रव्यूह यह फसाने का, भर्मित मन को यूं ही बहलाने का ।

जो रूठ के बैठे हैं बेवजह , उनको मनाने का, उनको हंसाने का ।

क्या साथ लेकर आए थे हम ...जो साथ लेके जाएंगे।

सहसा ही आए थे यहां और एकाएक मिट जाएंगे ।


..चलो आज एक बात बताता हूं


तुम जी भर के जिओ, संग में हर दुख दर्द सहो ।

ना कभी मै दिल से जिया, ना मुझे मरने का अब गिला ।

मिलेंगे कभी उस पार , तो बैठेंगे और करेंगे हर हिसाब ।

क्या पाया तूने रहके यहां, क्या खोया मैंने जाकर वहां ।


.. चलो आज एक बात बताता हूं


मिथ्या है तेरे रिश्ते जहां के, ना उनके मोह में बह जाना 

होके विवश आखिर में फिर तुम, खुद को चाहोगे बचाना ।

ना मोल कोई तेरे इस जीवन का, क्यूं व्यर्थ ही क्षण गवाना।

अत: तुम्हे मै देता हूं, जीने का एक बहाना ।


.. चलो आज एक बात बताता हूं


ना फिक्र करो किसी भूख की, ना तरसो धन-धान को ।

मार लो अपनी इच्छाएं सारी, काम क्रोध और नाम को ।

हो जाओ तुम शून्य, शिथिल और विलीन प्रभु श्रीराम को ।

फिर आएंगे स्वयं हरि एक दिन, लेने तुझे परम धाम को ।


..चलो आज एक बात बताता हूं ।

... तुम्हे जीने की राह दिखाता हूं ।।



 



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