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VIKASH YADAV

Comedy

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VIKASH YADAV

Comedy

जमाना

जमाना

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जमाने को थी एक दिक्कत खास

आती नहीं थी मेरी आवारगी रास

बदला लेने को उसने आज

लेकर मेरे अपनों का साथ  

.. 

एक साजिश रच डाली

कम्बख्तों ने मेरी शादी कर डाली ।

..

पर मालूम नहीं एक बात उन्हें

क्या कर पाएंगे कैद मुझे ?

एक गलती कर डाली

मिल गई मुझे जिन्दा दिलवाली

..

अब मुझे देते है गाली 

..

थी जेब मेरी कभी खाली

लेकिन पत्नी अब पैसों वाली

वो है इतनी भोली भाली

कि चाहे मै रोज मनाऊं दीवाली

..

अब मुझे देते है गाली

 ..

सब खुश रहो , आबाद रहो

इस जमाने की ना आड़ करो

इसका काम यही खाली

करता है सबकी निगरानी ।         

 


साहित्याला गुण द्या
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