STORYMIRROR

Hritik Raushan

Inspirational

4  

Hritik Raushan

Inspirational

खेल

खेल

1 min
72

है एक अटूट रिश्ता

खेल और दर्शकों के बीच,

मैं,तुम,तुम, मैं की जगह

हम का भाव हममें देता है सींच।


यहां ना कोई ऊंच,ना होता कोई नीच

ना ही देते धर्म और लिंग की लकीरें खींच।

हम तो देतें हैं ऊर्जा,

भरते हैं उत्साह अपनी मुट्ठी भींच

और करते हैं जीत को अपने समीप।


हैं खिलाड़ी और दर्शक

परस्पर सिखाते एक दूसरे को,

"हौसले बुलन्द कर रास्तों पर चल दे

मिल जाएगा तुझे तेरा मुकाम

बढ़कर पहल कर तू अकेला

देख कर तुझको काफिला बन जाएगा खुद।"


है यह रिश्ता एकता का प्रतीक 

और देता हमें यह सीख- 

"एक साथ आने से होती है शुरुआत हमारी

एक साथ रहना दिखाती है प्रगति हमारी

और एक ही लक्ष्य के लिए साथ

कार्य करना है कामयाबी हमारी।"


यह रिश्ता भरता है घावों को

हटाता है मतभेदों को

और बढ़ाता है सार्वभौमिक मूल्य।


होता है यह रिश्ता 

ठीक उसी तरह जैसे 

है रिश्ता

देशवासी और देश का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Hritik Raushan

खेल

खेल

1 min पढ़ें

आंगन

आंगन

1 min पढ़ें

अंत

अंत

1 min पढ़ें

फासला

फासला

1 min पढ़ें

छोटू

छोटू

1 min पढ़ें

शतंरज

शतंरज

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational