रिश्तों का एहसास
रिश्तों का एहसास
इंसान की हर धडकन में है रिश्तों का एहसास,
खामोशी में याद आता है रिश्तों का एहसास।
कुछ न कहे फिर भी समझे दिल की हर एक बात,
उस लफ़्ज़ों से भी बढ़कर है रिश्तों का एहसास।
भले ही कोई दूर रहे या तो पास न आ सके कभी,
फिर भी महसूस हम करते हूंँ रिश्तों का एहसास।
सुख-दुख की हर राह में जो सब का साथ निभाए,
वही सच्चा कहलाता जाता है रिश्तों का एहसास।
रिश्ता नाज़ुक सी डोर है ये, संभालो तो फूल बने,
वरना मन मायूस बना देता है रिश्तों का एहसास।
समय बदल जाने से जो इंसान कभी बदलता नहीं,
वही हमे दिखाई देता है सच्चे रिश्तों का एहसास।
तुटे दिलों को जोडने का यही है अनोखा करिश्मा,
"मुरली" बसंत को लहराता है रिश्तों का एहसास।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)
