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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy Inspirational Thriller

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy Inspirational Thriller

अधूरी ख्वाइशें

अधूरी ख्वाइशें

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जिंदगी में अधूरी ख्वाइशों की तडपन है,
हर मोड़ पर मन में रहती एक उलझन है,

मेरे दिल में रहती है तन्हाईयांँ की कहानी,
आँखों में बहता हुआ यादों का सफर है।

कुछ ख्वाइशें कभी मेरी पुरी हुई नही है,
हमेशा नसीब एक कदम पीछे चल रहा है,

ख्वाइशें पुरी करने के लिये बीती उम्र सारी,
मेरे नसीका का दरवाजा ही बंद दिखता है।

हर रात मेरी अब सुनसान बनी रहती है,
ख्वाबों का बना हुआ ये महल तुट रहा है,

मेरे चेहरे पर छुपी है दर्द की पीडा भारी,
खुशीयां की उम्मीद में डर छुपा रहता है।

जीवन में मुझे कभी न मिला वही प्यारा है,
आज तन्हाईयांँ ही मेरा हरपल सहारा है,

"मुरली" ये अधूरी ख्वाइशें कब पुरी होगी?
अब तो रब की कयामत का ही इंतजार है।

रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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