तेरा मधुर स्मित
तेरा मधुर स्मित
तेरे मधुर स्मितने ये दिल को शांत कर दिया,
एक ही नज़र में उसने मेरे दर्द को मिटा दिया।
तेरे गुलाबी होंठों पर मधुर स्मित को देखकर,
मेरा पत्थर जैसे दिल को उसने पिघला दिया।
तेरा मधुर स्मित देखकर मै दीवाना बन गया,
मेरा रोम रोम भी आनंद से लहराने लग गया।
मै तो आंसु बहा रहा था तेरी तस्वीर देखकर,
तेरे मधुर स्मित ने मेरे मन को सुकून दे दिया।
तेरे मधुर स्मित की भाषा अब तै समझ गया,
मेरी तन्हाईयांँ को उसने में ही दूर कर दिया।
दिल में प्रेम की ज्योत प्रजल्वित हुई देखकर,
तेरे मधुर स्मितने जीवन में उजाला कर दिया।
तेरा मधुर स्मित एसा ही फरकता रहे "मुरली",
मैने ख्वाबों का महल बनाना शुरु कर दिया।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

