तेरी नज़र का असर
तेरी नज़र का असर
तेरी नज़र में मैने उज़ाला होता हुआ देखा,
रात के अंधेरे को डरकर छूपता हुआ देखा।
तेरी नज़र का असर एसा हुआ मेरे दिल पर,
मेरा सुनसान मन भी महकता हुआ देखा।
तेरी नज़र मिली तो मैने सवेरा हुआ देखा,
रात के चमकतें सितारें शरमाता हुआ देखा।
तेरी नज़र का जादू एसा चला मेरे मन पर,
ये बहते हुए पवन को मैने रुकता हुआ देखा।
तेरी नज़र का असर मेरे दिल पर हुआ देखा,
मेरे पत्थर जैसे दिल को पिघलता हुआ देखा।
तेरी नज़र ने मुझे बिठाया नैनों की पलकों पर,
तेरे पलकों पर मैने खुद को झुलता हुआ देखा।
तेरी नज़र का असर एसी कायम रहे "मुरली",
तेरे इश्क का करिश्मा मैने बरसता हुआ देखा।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

