सितारों के शहर में
सितारों के शहर में
सितारों के शहर में आज आ गया हूंँ,
ख़्वाबों की रोशनी में खो गया हूंँ।
मन में छा गया है यादों का कारवाँ,
तुझे ढुंढने के लिये मै तडप रहा हूंँ।
सितारों के शहर में है मायूसी का असर,
आंहे भर भर के तुझे मै तरस रहा हूंँ।
रातों की सुनसानी में छुपे है अरमान,
सुबह होने का इंतज़ार मै कर रहा हूंँ।
विरह की आग में जल रहे है ख्वाब,
आंखों सें आंसु की धारा बहा रहा हूंँ।
आया हूंँ दिल में आशा ले कर मै आज,
तेरी तस्वीर दिल में ले कर घुम रहा हूंँ।
चेहरा दिखा दे "मुरली" को ओ जानेमन,
सितारों के शहर में तेरा मिलन चाहता हूंँ।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

