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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Drama

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Drama

दो हजार का नोट

दो हजार का नोट

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वाह रे दो हजार नोट तेरी माया

एकपल में तूने कर दिया, पराया

छोटे नोटो का था, तू एक राजा

सरकार ने बजा दिया, तेरा बाजा


बहुत याद आयेगा, गुलाबी साया

जिसमे छोटों का किरदार, समाया

एक दो हजार का नोट, घर आया

समझो सौ के बीस थे, वो भाया


अब वजन बढ़ेगा, कहर बढ़ेगा

जब दो हजार का मिटेगा, साया

वाह रे दो हजार नोट तेरी माया

जब-जब भी तू सामने आया


लोगो न कहा छुट्टा नही है, भाया

दो हजार तेरा महंगा था, किराया

छोटे नोटों का खत्म किया था, वाया

तेरे कारण कालाबाजार पनप आया


यही वजह, तुझ पर खतरा, मंडराया

फिर भी याद रहेगा, गुलाबी साया

जिसने भी क्या खूब कहर ढहाया

तेरे एक खो जाने से मन घबराया


दो हजार नोट तेरा वजन बड़ा था,

तूने आगे तीन शून्य का भार पाया

जिसने भी तुझको दुलारे से, कमाया

उसका मन तो था, बड़ा ही हर्षाया


अलविदा दो हजार के प्यारे नोट

यादों ने यादों से तेरा गीत गुनगुनाया।


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