Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Sushil Sharma

Abstract


5  

Sushil Sharma

Abstract


है उजाले का निमंत्रण

है उजाले का निमंत्रण

1 min 279 1 min 279


है उजाले का निमंत्रण क्यों तमस की बात हो    

आज तम को हम मिटाएँ फिर नवल शुरुआत हो  


हर निशा तम को समेटे द्वार पर मेरे खड़ी

रक्त को अपना जला कर सुबह की शुरुआत हो


आज सूरज सुबह से ही उन सवालों में घिरा

चाँदनी अब चीखती है रौशनी की बात हो   


है अगर विद्रोह का स्वर तो भला मैं क्या करूँ

सच कहूँगा मैं हमेशा चाहे मेरी मात हो


दीप हूँ जलता रहूँगा अन्ध से लड़ कर सदा  

हो उजाला हर नगर में चाहे कितनी रात हो

  

राह में मेरी हमेशा शूल कंटक पीर हैं 

पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sushil Sharma

Similar hindi poem from Abstract