STORYMIRROR

Dr Sushil Sharma

Romance

2  

Dr Sushil Sharma

Romance

ये चाँद

ये चाँद

1 min
45

ये जो चाँद है तुमसे जलता है इसलिए चुपचाप रात को निकलता है।

ये चाँद देख कर तुम्हें हाथ मलता है और चुपचाप छत पर टहलता है।

ये चाँद हर दिन देखता है तुम्हें फिर रात भर पिघलता है।

ये चाँद तुम्हें पाने के लिए दिन में सोता है और रात भर चलता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance