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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

मोगरे के फूल

मोगरे के फूल

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"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं

बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं 

"फूल" जब फूलों से श्रंगार कर आयेगी 

ये आंखें उसके सौंदर्य से बौरा जायेंगी 

एक तो उसके बदन की मदमाती महक 

उस पर मोगरे के फूलों की तीखी सुगंध 

वह दृश्य बहुत ही अद्भुत होने वाला है 

दो सुंदरताओं में गजब द्वन्द्व होने वाला है 

देखते हैं कि दोनों में कौन भारी पड़ता है 

होंठों के गुलाब या मोगरा , कौन जीतता है 

तुम्हारे सामने मोगरे की हैसियत ही क्या है 

होंठों के गुलाब के सामने उनकी बिसात क्या है

जब मोगरे के फूलों की "वेणी" बालों में सजेगी

हमारी सारी रात तुम्हारी जुल्फों में ही गुजरेगी 

फूलों के हार फूलों के कंगन फूलों की बाली

हमारे दिल में फूट रही है सावन की हरियाली

फूल सा दिल है मेरा देखो, कुचल ना देना तुम 

अपनी बांहों के हार पहना के बांध लेना तुम 

श्रंगार करके ये फूल भी खुद को धन्य समझेंगे 

तुम्हारे रूप सौंदर्य के सामने ये तो पानी भरेंगे 

अपनी भावनाएं इन फूलों में पिरो लाया हूं 

अपने "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं ।



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