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Suman Sachdeva

Romance


1.6  

Suman Sachdeva

Romance


जब तुम पास नहीं होते

जब तुम पास नहीं होते

1 min 743 1 min 743

कभी कभी 

जब तुम मेरे पास नहीं होते

तो अकेली नही होती हूं मैं


मुझसे बातें करता है 

वो कांच का गिलास 

कहता है रुको

पानी अभी थोड़ा ठंडा है


और वो चीनी का कप

मुझसे मुस्कराते हुये

कह रहा होता है

तुम चाय बहुत बढ़िया बनाती हो


और वो फूल की पत्तियां

 हथेली में आकर

 लगाती हैं गुहार कि

यह महक कभी जुदा न होने पाये


और तभी हाथ की अंगूठी

अंगुली में गोल- गोल घूमती 

करने लगती है कुछ भेदभरी बातें 

और मैं सुनती रहती हूं जड़वत


बस फिर तुम्हीं होते हो 

अगल बगल, इधर उधर

सब ओर 

हंसते, मुस्कराते, बतियाते


हां ! अकेली नहीं होती हूं मैं

जब तुम मेरे पास नहीं होते।


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