STORYMIRROR

Suman Sachdeva

Others

4  

Suman Sachdeva

Others

'होली में '

'होली में '

1 min
308


भुला के गम सभी चेहरे ही मुस्काते हैं होली में 

कि दुश्मन भी तो अपने मीत बन जाते हैं होली में


मुहब्बत के हसीं रंगों से पिचकारी को भर भर के

गुलालों से वो तन मन को भिगो जाते हैं होली में


निगाहें हैं तरस जाती कि जिनकी दीद को अक्सर

वही जलवा मुहब्बत का दिखा जाते हैं होली में


जरा सा हँस के शरमा के औ' चुपके से करीब आके

कि बन के प्यार की खुशबू वो घुल जाते हैं होली में


जो दरवाजे दिलों के बंद मुद्दत से पड़े रहते

खुशी से खुद ही इठला के वो खुल जाते हैं होली में 


न आओ तुम बुलाने से तो भी शिकवा नही कोई

चलो हम खुद तुम्हारे पास लौट आते हैं होली मे


कुछ ऐसे रंग होते जो उतर जाते हैं धोने से

मगर कुछ रंग पक्के दिल पे चढ़ जाते है होली में।

       


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन