STORYMIRROR

Suman Sachdeva

Abstract

4  

Suman Sachdeva

Abstract

जीताने के लिए

जीताने के लिए

1 min
408

प्यार में सब कुछ लुटाया इस जमाने के लिए

हार बैठे खुद को हम उनको जीताने के लिए


मेरी हर इक सांस पर काबिज हुए वो इस कदर

धड़कता है दिल भी बस उनको बुलाने के लिए


लो सुनो अब रूठ जाओ बेवजह ही हम‌से तुम

आज फिर आएंगे हम तुमको मनाने के लिए


याद करते करते उनको आंख थी इक पल लगी

आ गये सपनों में फिर मुझको‌ सताने के लिए


दूर जाना था यूं हमसे एक दिन सब छोड कर

पास क्यों आए थे मेरा दिल चुराने के लिए


वादा था उनसे कि हमने हंसके होना है जुदा 

जाने कितने‌ आंसू रोके मुस्कराने के लिए


नींद गर पलकों से तेरी रूठ जाए जब कभी

आएंगे ख्वाबों में हम तुमको सुलाने के लिए


हो तुम्हारे बस में तो तुम भूल जाओ शौक से

हमको चाहिए इक उम्र तुमको भुलाने के लिए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract