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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

चिलमन

चिलमन

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🌺 इत्र अहसासों का : भाग 8 🌺
🌹 चिलमन 🌹
✍️ श्री हरि
🗓️ 7.1.2026

चिलमन की ओट से जब नज़र मुस्कराई,
मेरे हर ख़्वाब में रेशम सी आग भर आई।

नक़ाबों ने भी तेरा हुस्न कब रोका है,
हया ही तो है तेरी सबसे गहरी अंगड़ाई।

पलकों के साए में जब साँस ठहरने लगी,
लगा रूह ने तेरी देह की भाषा अपनाई।

न छुआ तुमने, मगर यह कैसा करिश्मा था,
मेरी हर नस में तेरे हुस्न की गर्मी उतर आई।

चिलमन के उस पार लबों की थरथराहट,
जैसे किसी अधूरी रात की हो पूरी सच्चाई।

तेरी चुप्पी में जो लिपटी हुई चाहत थी,
वही तो थी मेरे मन की सबसे बड़ी परछाई।

जब ज़रा-सी हटी चिलमन, झुक गई पलकें,
शर्म ने हुस्न ए जमाल की इजाज़त समझाई।

और जब ढकी रही—तब भी क़यामत थी,
कि छुपे हुस्न ने ही अक्सर है आग लगाई।


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