STORYMIRROR

Ranjana Jaiswal

Romance

5  

Ranjana Jaiswal

Romance

जबकि तुम

जबकि तुम

1 min
535


जबकि तुम 

चले गए हो कब के बिखेर कर 

जिंदगी के कैनवस पर ताजा रंग 

शहर में तुम्हारी गंध 

फैली है अभी भी

हर आयोजन में

अखबार के पन्नों में

ढूँढती हूँ तुम्हें

सपने में मिलती हूँ

लगभग रोज

आज भी उसी आवेग से

जबकि चले गए हो तुम 

कब के

अब जब कि तुम चले गए हो 

नहीं टपकती तुम्हारी बातें 

पके फल की तरह

नहीं गूँजता मन में

मादक संगीत

झुक गए हैं फूलों के चेहरे 

झर गया है पत्तियों से संगीत 

नहीं उतरती 

अब कोई साँवली साँझ 

मन की मुंडेर पर.



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance