STORYMIRROR

Amit Singhal "Aseemit"

Drama Classics Fantasy

4  

Amit Singhal "Aseemit"

Drama Classics Fantasy

दिल को बहुत सताया

दिल को बहुत सताया

1 min
263

दिल को बहुत सताया।

मन को बहुत रिझाया।

दोनों को बहुत सिखाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


अच्छी यादों से ख़ुद को हंसाया।

कड़वी यादों से ख़ुद को रुलाया।

मीठी यादों से ख़ुद को चखाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


मत कस विचारों पर नकेल।

सारे ख़्यालों को बाहर धकेल।

दिल को यह बहुत समझाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


दिल का सारा गुब्बार निकाल।

मत कर कोई भी जवाब सवाल।

दिल को यह कहकर डराया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


जज़्बात तेरे कैसे कोई जानेगा।

जब तक तू नहीं यह ठानेगा।

सब लिख डाल, दिल को मनाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


किसी के अहसास ने जादू चलाया।

अपने मन को फिर से मचलाया।

दिल को बहुत तड़पाया तरसाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


दिल पर बहुत सितम ढाया।

तरह तरह से डराया धमकाया।

प्यार से भी बहुत बहकाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


जब दिल टूटा था, वह दोहराया।

वह पल वह लम्हा याद कराया।

सुनहरी यादों से मन गुदगुदाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


नई उमंग तरंग से मन सजाया।

नए ख़्वाब दिखाकर ललचाया।

मीठे सपने सजाकर फुसलाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


दिल को बहुत सताया।

मन को बहुत रिझाया।

दोनों को बहुत सिखाया।

तभी मैं कुछ लिख पाया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama