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Kanchan Prabha

Romance Classics


4.7  

Kanchan Prabha

Romance Classics


बैरी चाँद पूनम का

बैरी चाँद पूनम का

1 min 441 1 min 441

ये बैरी चाँद पूनम का और

आँचल धानी सफेद

धरती पर आसमां की

खोले सुन्दर भेद 

रेत पर जैसे बहती कोई

शीतल नदी की धार

देख मृगा भी मृगनैनी से

करने लग गया प्यार


रात की कलियाँ भवरों के संग

मिल कर गाये गीत

मधुर प्रेम के प्रणय पाश में 

झूम उठे मनमीत

होठों पर मुस्कान भरी अब

हुआ सुहाना मौसम

चंद्रप्रभा से जग ये चमका

दूर हुये हैं हर गम

दौड़ लगाता छुप कर हंसा

नाच उठे थे मोर

कितनी सुन्दर कितनी पावक

होगी कल की भोर

  

    



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