STORYMIRROR

Bharat Jain

Abstract

4  

Bharat Jain

Abstract

तू

तू

1 min
391

तू गीतों में

तू मंत्रों में


तू ही रागी

तू वैरागी


तू काजल में

तू कालिख में


तू ही बंधन

तू ही मुक्ति


तू दुविधा में

तू सुविधा में


तू मूरत में

तू सूरत में


तू ही गागर

तू ही सागर


तू ही प्रण में

तू ही रण में


तू ही कंकड़

तू ही शंकर


तू ही मुझमें

तू ही सबमें


तू ही वायु

तू ही स्नायु


तू इस क्षण में

तू हर क्षण में


तू ही बाहर

तू ही भीतर


तू ही घट में

तू घट घट में



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract