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Bharat Jain

Abstract

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Bharat Jain

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तू

तू

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तू गीतों में

तू मंत्रों में


तू ही रागी

तू वैरागी


तू काजल में

तू कालिख में


तू ही बंधन

तू ही मुक्ति


तू दुविधा में

तू सुविधा में


तू मूरत में

तू सूरत में


तू ही गागर

तू ही सागर


तू ही प्रण में

तू ही रण में


तू ही कंकड़

तू ही शंकर


तू ही मुझमें

तू ही सबमें


तू ही वायु

तू ही स्नायु


तू इस क्षण में

तू हर क्षण में


तू ही बाहर

तू ही भीतर


तू ही घट में

तू घट घट में



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