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Mansi Jain

Abstract

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Mansi Jain

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जीवन है बस नाम चलने का

जीवन है बस नाम चलने का

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बरसात यूँ तोह संग अपने रंग हज़ार लाती है 

जैसे काली बदरा भी इंद्रधनुष से छट जाती है 

पर जब यही बरसात का जीवनदायी

जल काफी समय तक एक जगह रुक जाता है 


निर्मल से वह बेदल हो जाता है 

बस ऐसे ही कुदरत भी

सीख हमें जीवन की दे जाती है 

प्रलय होने के बाद भी रुकना नहीं

जीवन में आगे बढ़ना हमें सीखाती है 


क्या उन माताओं की पीड़ा से भी

बढ़कर तुम्हारी पीड़ा है क्या 

जो हँसते रोते तिरंगा अपने

शहीद पुत्र के तन पर उड़ाती है 


क्या उन निर्दोष विधवाओं का दोष है 

जो फक्र से अपने शहीद हमनवा

को न्योछावर कर जाती हैं 

जीवन है बस नाम चलने का 


हर स्थिति में तपकर निखारने का 

है मुसाफिर तुम रुक जाना नहीं 

जीवन है बस नाम चलने का 

हर स्थिति में तपकर निखारने का। 


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