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Mansi Jain

Abstract

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Mansi Jain

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है स्त्री तू आग है

है स्त्री तू आग है

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तू आग है

तू भामण्डल का स्वर्णिम भाग है

है स्त्री तू ममता की मूर्त तू जननी है

तू प्रतिकूलता में भी निश्छल

तू असुरों की चंडी है


है स्त्री तू आग है

तू भामण्डल का स्वर्णिम भाग है

तू कुदरत की उत्कृष्ट कृति है

तू निराशा में आशा की ध्वनि है


तू प्रेम है

तू त्याग है

तेरा चरित्र निर्मल प्रयाग है

तू मर्दानी हाँ तू मर्दानी है

या मर्दो के लिए मिसाल निराली है


है स्त्री तू आग है

तू भामण्डल का स्वर्णिम भाग है

तू कुदरत की उत्कृष्ट कृति है।


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