STORYMIRROR

Bharat Jain

Abstract

3  

Bharat Jain

Abstract

वहां हर कोई

वहां हर कोई

1 min
188

तू भी था मैं भी था और वो भी तो था,

वहाँ हर कोई हमारे जैसा ही तो था।

 

वहाँ न तुलसी, न चंदन, ना ही राम थे,

आज का ये संगम अधूरा ही तो था।

 

अगर तुम न मिलते तो खो गए होते

मेरा पता सिर्फ़ तुम्हारे पास ही तो था

 

वक्त ने वो चमक छीन ली चेहरे से,

वरना ये सारा शहर दीवाना ही तो था।

 


 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract