STORYMIRROR

Bharat Jain

Abstract

3  

Bharat Jain

Abstract

मैं भूल गया

मैं भूल गया

1 min
119

जब सुनते सुनते मन फूल गया

मैं कहते कहते कुछ भूल गया।


जो कागज़ पढ़ना सीख गया

फिर क्या पढ़ने स्कूल गया।


जब जब न पीछे लौट सका

तो में घर का रास्ता भूल गया।


कब किस सपने में मिले थे हम

शायद इस सपने में भूल गया।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract