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GAUTAM "रवि"

Romance Others

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GAUTAM "रवि"

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"तुम और मैं"

"तुम और मैं"

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तुम अगर कर सको उम्र भर, तो मैं इंतज़ार हो जाऊँ,

तुम अगर कल कोई खबर बनो, तो मैं अखबार हो जाऊँ,

तुम बस पलकों को झुका देना मैं खुद समझ जाऊँगा,

जो तुम अगर शरमा जाओ, तो मैं इज़हार हो जाऊँ,


बन जाना तुम शब्द मेरे, मेरी कविता तुम हो जाना,

मेरे ख्यालों की बस्ती में, तुम भी कहीं गुम हो जाना,

मैं बन जाऊँ कोई मुहावरा, कोई छंद मैं हो जाऊँ,

तुम बनो अगर समास कोई, तो मैं अलंकार हो जाऊँ,


जब रातों में सन्नाटे हों, हो खामोशी सी चारों ओर,

तुम बनो अगर पायल कोई, तो मैं झनकार हो जाऊँ,

तुम तो हो पूरी परिपक्व, मैं तो मूर्ख अज्ञानी हूँ,

जो तुम समझा दो मुझे अगर, तो मैं समझदार हो जाऊँ,


ना तो कोई पाप कभी और ना कोई गुनाह किया मैंने,

जो तुम मिलो अगर सज़ा में तो मैं भी गुनाहगार हो जाऊँ,

तुम सा तो कोई भाव नहीं, ना तुम जैसा कोई किरदार,

जो बनो कहानी मेरी तुम तो मैं उपसंहार हो जाऊँ,


देखे हैं मैंने जादू टोने, देखे हैं कितने तंत्र मंत्र,

मुस्करा दो ज़रा अगर तुम, तो मैं चमत्कार हो जाऊँ,

हुई सुबह है देखो अब, खिल उठा है फिर से वही 'रवि',

जो तुम थोड़ी नाराज़ रहो, तो मैं अंधकार हो जाऊँ।



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