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Shakuntla Agarwal

Drama

5.0  

Shakuntla Agarwal

Drama

माला

माला

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साँसों की माला टूट गयी तब,

जोड़ने वाला कोई नहीं !

यौवन के मद में भरके बन्दे,

तू इतना इतराता है,


तुझे सुबह-शाम का पता नहीं,

फ़िर भी तू गणित लगाता है !

यौवन तेरा ढलने लगा जब,

चाम का प्यारा कोई नहीं !


साँसों की माला टूट गयी तब,

जोड़ने वाला कोई नहीं !


माटी तेरा जिस्म बनेगा,

राख उड़ेगी इक पल में !

यार-दोस्त तेरे सगे-सम्बन्धी,

रो-रोकर नीर बहायेंगे !


जो तुझसे लिपटे जाते थे,

वही ख़ौफ़ खायेंगे !

साँस तन से निकल गयी तो,

जग में रखईया कोई नहीं !


साँसों की माला टूट गयी तब,

जोड़ने वाला कोई नहीं !

तन-मन तूने होम किया है,

जिनको आज बनाने में !


घर हो या महल-दूँमहले,

सभी यहीं रह जाएंगे !

संग में तेरे कफ़न चलेगा,

संग में चलैया कोई नहीं !


साँसों की माला टूट गयी तब,

जोड़ने वाला कोई नहीं !


यारे-प्यारे सगे-सम्बन्धी,

जल्दी तुझे उठाएंगे !

ले जाकर तुझको बन्दे,

अग्नि में वो जलाएंगे !


कपाल क्रिया तेरी होगी

"शकुन" तुझको बचैया कोई नहीं !

साँसों की माला टूट गयी तब,

जोड़ने वाला कोई नहीं !


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