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SURYAKANT MAJALKAR

Fantasy Children

2.6  

SURYAKANT MAJALKAR

Fantasy Children

लाडली पापा की

लाडली पापा की

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चुप्पी होठों पे रहे।

आहट न सुनाई दे।

कंगन न खनकने दे।

पायल न बजने दे।

खेलकर पापा की

गोद में, 

सोयी है मेरी लाडली।


अरी! ओ बारिश 

जरा धीरे बरसना।

ख्वाबों में खो गयी है

मेरी शोना।

उसको ना सताना।


काहे ? कबूतर भाईं

कौवे साथ लग गये।

न मधुर आवाज़ तुम्हारी।

उसके कान जाग गये।


मम्मी ने हार मानी ।

मुन्नी बड़ी सयानी।

भूलकर मम्मी की गोद।

बनी पापा की रान।



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