STORYMIRROR

anita Kushwaha

Fantasy

4  

anita Kushwaha

Fantasy

मैं तुम्हें फिर मिलूँगी

मैं तुम्हें फिर मिलूँगी

1 min
391

प्रिय

अगर तुम बादल बन जाओगे

तो मैं तुमसे एकाकार होकर

धरती पर बरस जाऊँगी

प्रिय

अगर तुम फूल बन जाओगे

तो मैं तुममें समाकर

खुशबू फैलाऊंगी

प्रिय

अगर तुम फसल बन जाओगे

तो मैं तुमसे मिलकर

खेतों में लहलहाऊंगी

प्रिय

अगर तुम पेड़ बन जाओगे

तो मैं फल और फूल से

खिलखिला जाऊंगी

प्रिय

अगर तुम सागर बन जाओगे

तो मैं नदिया बनकर

जीवन की रवानी बन जाऊंगी

प्रिय

तुम कहीं भी रहो

कुछ भी बन जाओ

मैं तुम्हें फिर मिलूँगी

रूप बदल-बदलकर


               


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy