STORYMIRROR

anita Kushwaha

Tragedy

3  

anita Kushwaha

Tragedy

इंतजार

इंतजार

1 min
331

 सुना है मैंने

खामोशी की आवाज

बिन बजते

साज़ों की आवाज

सांस जो ....

चलती रहती है

मगर ठहरी

सी लगती है

नींद खुली आँखों में

आती है

जीवन बन्द आँखों में

पलता है

धड़कने रुकी सी

लगती हैं

ठहरा पानी

शोर मचाता है

चलते हुए इंतजार को

रोक ना देना तुम

मंजिल ये संदेशे देती है।

                

                



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy