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anita Kushwaha

Tragedy

3  

anita Kushwaha

Tragedy

इंतजार

इंतजार

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 सुना है मैंने

खामोशी की आवाज

बिन बजते

साज़ों की आवाज

सांस जो ....

चलती रहती है

मगर ठहरी

सी लगती है

नींद खुली आँखों में

आती है

जीवन बन्द आँखों में

पलता है

धड़कने रुकी सी

लगती हैं

ठहरा पानी

शोर मचाता है

चलते हुए इंतजार को

रोक ना देना तुम

मंजिल ये संदेशे देती है।

                

                



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