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Nikki Sharma

Tragedy


0.2  

Nikki Sharma

Tragedy


कैसे कह देते हो तुम

कैसे कह देते हो तुम

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प्यारी हूं न्यारी हूं पूरे घर की राज दुलारी हूं

मान सम्मान सब मुझको देते आसमां में छा जाऊं

कल्पना वह मुझसे हर पल बुनते

बुरी नजर से मुझे बचाते पढ़ो, लिखो, खुब


आगे बढ़ो तुम हर बात, हर पल मुझको समझाते

उड़ती रहती हूं हर कोने में चिड़ियों सी चहकती रहती हूं

जो मन में आता है मेरे, वही तो मैं करती हूं

क्या पता था एक दिन उड़ जाना है 


मुझे भी ब्याह कर पराई बन जाना है

दर्द तकलीफ अकेले झेलती हूं कुछ ना

किसी से कह पाती हूं अपनों के बीच में भी

हर लम्हा अकेली, पराई सी रह जाती हूं


हर रोज, दिन, महीने बदल रहे हैं भाई-बहन

मम्मी, पापा को देखने को नजर तरस रहें हैं

कुछ ना कहो फिर भी मां टोह ही लेती है

वो दिल की बातें बिन कहे सब समझ ही लेती है


कुछ ना बोलो फिर भी आंखों की नमी सब कह देती है

दिल रहता वहीं सदा जहां कभी साथ हर पल रहती थी,

हर दर्द उनका आंखों से देखती थी

आज भी दिल में हुक सी उठ जाती है जब भी


कभी मायके में कुछ तकलीफ किसी को हो जाती है

एहसास हर पल हर लम्हा हो जाता है

हर पल आज भी मेरे स्मृतियों में वह बसता है

मायके की पीड़ा समझ सकती हूं


दिल ही दिल में तड़प उठती हूं अब तो

मैं कितना बदल गई हूं पराए घर आ गई हूं

अतीत, वर्तमान, भविष्य मायके की क्या भूल सकती हूं मैं

यादें बीते कल की आज भी संजोती हूं मैं


कानों में आज भी गूंज उठती है सबकी आवाज

वो एहसास हर पल है आज भी मेरे साथ-साथ

हां सच है.. घर परिवार सब बदल गया शादी के बंधन से

बदल गया ब्याह कर मायके से बाहर निकल गए


पल भर में कह दिया पराई हो गई हो तुम

आंखों से नीर बह रहे एक ही सवाल कह रहे हैं

क्यों ये आंसू क्यों यह तड़प अब तो मैं अपने घर आई हूं

कैसे कहूं इनसे अब तो मैं पराई हूं संसार का वरदान है यह


बेटी हूं दूसरे घर जाना है बचपन से यही तो सबने माना है

पर आज भी आंखों से बह जाते हैं नीर

हर दर्द उनका सुनकर दिल में उठ जाते हैं पीर

आज भी तड़प उठती हूं मैं उनके हर जख्म, दर्द, खुशी में


हर पल में कह देते सब कैसे फिर भी मैं पराई हूं

प्रेम है पीड़ा है, हर बदलाव उनके बिना अधूरा है

रोज बातें उनकी मन में बसती है सारी बातें

उनके ही तो दिल में चलती रहती है


बदल गया सब कुछ फिर भी मां तो मां ही,

पिता ..पिता ही रहते हैं, भाई-बहन

रिश्ते, नाते कुछ भी नहीं बदलते हैं

पीड़ा, खुशी में आज भी सबके साथ निभाती हूं


कहते हो तुम मुझसे फिर कैसे.. फिर भी मैं पराई हूं.. 

हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं।


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