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Prafulla Kumar Tripathi

Tragedy Inspirational

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Prafulla Kumar Tripathi

Tragedy Inspirational

ज़िन्दगी..

ज़िन्दगी..

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धूप है कि छांव है, 

ज़िन्दगी इक भूले बिसरे गांव हैं।


कुछ मिले , कुछ खो गये हैं, 

कुछ खिले , कुछ अध खिले हैं।

थक चुके अब चलते चलते पांव हैं, 

बीच दरिया आज डूबे नाव हैं।।

................ज़िन्दगी इक भूले बिसरे गांव हैं।

होश पाते ही हुआ, 

तन-मन पतंगा।

पिल पड़ा करने , 

कठौती में ही गंगा।।

मोह-माया में फंसी सब जान हैं, 

....... ज़िन्दगी इक भूले बिसरे गांव हैं।।

धूप है कि छांव है, 

ज़िन्दगी इक भूले बिसरे गांव हैं।।



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