STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy

5  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy

प्रयोगशाला

प्रयोगशाला

1 min
480

जीवन से बड़ी प्रयोगशाला

इस दुनिया में और कोई नहीं है 

रिश्तों के रासायनिक विलयन से 

जो आनंद रूपी पदार्थ बनता है 

उसका कोई जवाब नहीं है । 


संवेदनाओं की धातु पर 

जब अपमान का अम्ल गिरता है 

तब एक भयानक विस्फोट होता है

और सब कुछ नष्ट हो जाता है । 


जीवन की इस प्रयोगशाला में 

बेइमानी , धोखाधड़ी , धूर्तता 

का रसायन बहुतायत में होता है

सच्चाई , ईमानदारी का स्टॉक 

अब धीरे धीरे समाप्त हो रहा है 

रिश्तों की सुलगती आंच में 

जैसे बुढ़ापा झुलस रहा है 

भारी भारी बस्तों के बोझ तले 

मासूम सा बचपन पिस रहा है 

वफादारी की पैकिंग के अंदर

बेवफ़ाई का पाउडर बिक रहा है

इस कारण इस प्रयोगशाला का 

तापमान दिनों दिन बढ़ रहा है 


हर एक इंसान के अंदर

अहंकार की गैस भरी हुई है 

झूठ के तीखे आक्रमण से 

सच्चाई की बुनियाद हिली हुई है 

अपना काम निकलवाना ही 

सबका एकमात्र उद्देश्य रह गया है 

मनुष्य का जीवन अब तो 

प्रपंचों की प्रयोगशाला बना गया है ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy